Showing posts with label deepak. Show all posts
Showing posts with label deepak. Show all posts

Saturday, August 7, 2010

Looking beyond sun set












It is not always that evening sky can enthrall you....life, scenes, images are everywhere for us to capture. What about well lit underpass (well there is light necklace in the tunnel, not only the light at the end of tunnel)..... if you want to create dancing lights, just follow tail lights of moving traffic ahead and click with unsteady hand...enjoy another evening...may be little different way

Friday, June 4, 2010

Calligraphy....my passion

Some of the new works

Wednesday, August 27, 2008

Public Library & Activity Centre

मेरी काम करने की जगह राजापुरी ( द्वारका) मेरे आस पास रहने वाले मजदुर व नौकरी वाले लोग हैं उनके बच्चे पिछले दो तीन साल से समर कैंप या कभी पेंटिंग कम्पीटीशन मैं आते रहते थे

लायब्रेरी कम एक्टिविटी सेंटर खोलने का एक छोटा सा सपना था ताकि आस पास के बच्चे इस का फायदा उठा सकें जो पुस्तके हम पढ़ चुके होतें हैं वोह बरसो ऐसे ही पड़ी रह जाती हैं सोचा क्यों न उनका उपयोग किया जाय


बस कुछ जगह अपने काम की जगह से निकाल कर लायब्रेरी को मार्क कर दी फिर अपने आस पास के लोगो को इसमे जुड़ने की प्रेरणा दी और आनन् फानन मैं लायब्रेरी खुल गई

बच्चों का उत्साह देखने लायक था पहले दिन अगर पाँच दस थे तो अगले दिन बीस और पांचवा दिन आते आते अस्सी बच्चे किताबें लेने आ पहुंचे

फिर सोचा क्यों न पुराने पड़े कम्प्यूटर का भी इस्तेमाल किया जाय बच्चों के लिए उसको भी लायब्रेरी वाले हिस्से मैं रख दिया

एन झी सी मैं काम कर रहे मेरे बचपन के मित्र विश्व गोरव ने कुछ पुस्तके और एक कंप्युटर दे दिया और लियां आर के शाह ने तो बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया लायब्रेरी के लिए फर्निशिंग का सामान पुस्तके और कप्यूटर दे डाला अब तक लायब्रेरी की सर्वीस दो हज़ार से भी ज्यादा बार ली जा चुकी हे

एक कम्प्यूटर टीचर भी आने लगा हे आशा कर रहे हैं आप सब के सहयोग से यह कार्यक्रम यूँ ही चलता रहे

निवेदन हे यदि आप के पास पुराने किताबे या कंप्युटर हों तो उन्हें रद्दी मैं न दे हमें 9811455949 पर फ़ोन करे या आप
deepakarora_drp83@rediffmail.com पर ईमेल करे हम उन्हें लेने के लिए तत्काल आप के पास चले आयेंगे

और यदि आप के पास समय हों तो बच्चों के बीच आकर उन्हें अपने ज्ञान व तजुर्बे का हिस्सा दे ताकि वो उसका उपयोग कर आगे बढ़ सके