Thursday, November 6, 2008

अनोखी दिवाली



अब की बार की दिवाली कुछ हट कर थी | दिवाली से दो दिन पहले राज कुमारी अमृत कौर के स्टूडेंट्स के साथ ऐड्स पर नुक्कड़ नाटक तैयार किया था और उसमे एक गीत डाला था " हाथ से हाथ मिलाओ, प्यार के फूल खिलाओ" |




लाइब्रेरी मैं आया तो पाया कि कुछ कारण सारे कम्प्यूटर्स काम नहीं कर रहे थे और बच्चे मायूस थे | सोचा क्यों कुछ मस्ती हो जाए और आनन् फानन में दिवाली मानाने का कार्यक्रम बन गया | बच्चों से कहा कि दिवाली के लिए रंगोली बनायें और कुछ दिए रंग ले | सब बच्चों से कहा कि " हाथ से हाथ मिलाओ" गीत तैयार करते हैं ताकि सभी इसे मिल कर दिवाली कि शाम को गायें गे |




अगले दो दिन गीत बाकी चीजे तैयार करने में निकल गए | दिवाली कि पूर्व संध्या पर सब बच्चे एकत्रित हो गए | सब ने पहले रंगोली बनाया , अपने बनाए कुछ नए दिए मोमबतियां जलाई | इस दिन के लिए खा कर के मेरे मित्र गौरव का परिवार वहां पर आया था | बच्चों ने पूजा से पहले गीत गाया आरती की | एक छोटे से जलपान के साथ दिवाली की सब ने एक दूसरे को शुभकामनाएँ दी |

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