Innovative and Creative.... Die hard fan of creativity personified....any product design/developed is combination of technology, art and craft...and one can make it happen with ability to see, hear, understand, analyse, appreciate and criticise...one just need to be end-to-end soltution provider.
Friday, June 4, 2010
Calligraphy....my passion
Some of the new works
Labels: medical physicist, library, children
calligraphy,
deepak
Saturday, November 29, 2008
Thursday, November 6, 2008
अनोखी दिवाली
अब की बार की दिवाली कुछ हट कर थी | दिवाली से दो दिन पहले राज कुमारी अमृत कौर के स्टूडेंट्स के साथ ऐड्स पर नुक्कड़ नाटक तैयार किया था और उसमे एक गीत डाला था " हाथ से हाथ मिलाओ, प्यार के फूल खिलाओ" |
लाइब्रेरी मैं आया तो पाया कि कुछ कारण सारे कम्प्यूटर्स काम नहीं कर रहे थे और बच्चे मायूस थे | सोचा क्यों न कुछ मस्ती हो जाए और आनन् फानन में दिवाली मानाने का कार्यक्रम बन गया | बच्चों से कहा कि दिवाली के लिए रंगोली बनायें और कुछ दिए रंग ले | सब बच्चों से कहा कि " हाथ से हाथ मिलाओ" गीत तैयार करते हैं ताकि सभी इसे मिल कर दिवाली कि शाम को गायें गे |
अगले दो दिन गीत व बाकी चीजे तैयार करने में निकल गए | दिवाली कि पूर्व संध्या पर सब बच्चे एकत्रित हो गए | सब ने पहले रंगोली बनाया , अपने बनाए व कुछ नए दिए व मोमबतियां जलाई | इस दिन के लिए खास कर के मेरे मित्र गौरव का परिवार वहां पर आया था | बच्चों ने पूजा से पहले गीत गाया व आरती की | एक छोटे से जलपान के साथ दिवाली की सब ने एक दूसरे को शुभकामनाएँ दी |
Wednesday, August 27, 2008
Public Library & Activity Centre
मेरी काम करने की जगह राजापुरी ( द्वारका) मेरे आस पास रहने वाले मजदुर व नौकरी वाले लोग हैं उनके बच्चे पिछले दो तीन साल से समर कैंप या कभी पेंटिंग कम्पीटीशन मैं आते रहते थे
लायब्रेरी कम एक्टिविटी सेंटर खोलने का एक छोटा सा सपना था ताकि आस पास के बच्चे इस का फायदा उठा सकें जो पुस्तके हम पढ़ चुके होतें हैं वोह बरसो ऐसे ही पड़ी रह जाती हैं सोचा क्यों न उनका उपयोग किया जाय
बस कुछ जगह अपने काम की जगह से निकाल कर लायब्रेरी को मार्क कर दी फिर अपने आस पास के लोगो को इसमे जुड़ने की प्रेरणा दी और आनन् फानन मैं लायब्रेरी खुल गई
बच्चों का उत्साह देखने लायक था पहले दिन अगर पाँच दस थे तो अगले दिन बीस और पांचवा दिन आते आते अस्सी बच्चे किताबें लेने आ पहुंचे
फिर सोचा क्यों न पुराने पड़े कम्प्यूटर का भी इस्तेमाल किया जाय बच्चों के लिए उसको भी लायब्रेरी वाले हिस्से मैं रख दिया
ओ एन झी सी मैं काम कर रहे मेरे बचपन के मित्र विश्व गोरव ने कुछ पुस्तके और एक कंप्युटर दे दिया और लियां आर के शाह ने तो बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया लायब्रेरी के लिए फर्निशिंग का सामान पुस्तके और कप्यूटर दे डाला अब तक लायब्रेरी की सर्वीस दो हज़ार से भी ज्यादा बार ली जा चुकी हे
एक कम्प्यूटर टीचर भी आने लगा हे आशा कर रहे हैं आप सब के सहयोग से यह कार्यक्रम यूँ ही चलता रहे
निवेदन हे यदि आप के पास पुराने किताबे या कंप्युटर हों तो उन्हें रद्दी मैं न दे हमें 9811455949 पर फ़ोन करे या आप deepakarora_drp83@rediffmail.com पर ईमेल करे हम उन्हें लेने के लिए तत्काल आप के पास चले आयेंगे
और यदि आप के पास समय हों तो बच्चों के बीच आकर उन्हें अपने ज्ञान व तजुर्बे का हिस्सा दे ताकि वो उसका उपयोग कर आगे बढ़ सके
लायब्रेरी कम एक्टिविटी सेंटर खोलने का एक छोटा सा सपना था ताकि आस पास के बच्चे इस का फायदा उठा सकें जो पुस्तके हम पढ़ चुके होतें हैं वोह बरसो ऐसे ही पड़ी रह जाती हैं सोचा क्यों न उनका उपयोग किया जाय
बस कुछ जगह अपने काम की जगह से निकाल कर लायब्रेरी को मार्क कर दी फिर अपने आस पास के लोगो को इसमे जुड़ने की प्रेरणा दी और आनन् फानन मैं लायब्रेरी खुल गई
बच्चों का उत्साह देखने लायक था पहले दिन अगर पाँच दस थे तो अगले दिन बीस और पांचवा दिन आते आते अस्सी बच्चे किताबें लेने आ पहुंचे
फिर सोचा क्यों न पुराने पड़े कम्प्यूटर का भी इस्तेमाल किया जाय बच्चों के लिए उसको भी लायब्रेरी वाले हिस्से मैं रख दिया
ओ एन झी सी मैं काम कर रहे मेरे बचपन के मित्र विश्व गोरव ने कुछ पुस्तके और एक कंप्युटर दे दिया और लियां आर के शाह ने तो बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया लायब्रेरी के लिए फर्निशिंग का सामान पुस्तके और कप्यूटर दे डाला अब तक लायब्रेरी की सर्वीस दो हज़ार से भी ज्यादा बार ली जा चुकी हे
एक कम्प्यूटर टीचर भी आने लगा हे आशा कर रहे हैं आप सब के सहयोग से यह कार्यक्रम यूँ ही चलता रहे
निवेदन हे यदि आप के पास पुराने किताबे या कंप्युटर हों तो उन्हें रद्दी मैं न दे हमें 9811455949 पर फ़ोन करे या आप deepakarora_drp83@rediffmail.com पर ईमेल करे हम उन्हें लेने के लिए तत्काल आप के पास चले आयेंगे
और यदि आप के पास समय हों तो बच्चों के बीच आकर उन्हें अपने ज्ञान व तजुर्बे का हिस्सा दे ताकि वो उसका उपयोग कर आगे बढ़ सके
Labels: medical physicist, library, children
activity centre,
deepak,
kids,
library,
volunteer
Monday, August 27, 2007
welcome
Everyone of us has creative instincts, we spend hours, days, months and sometime years just to see to it that little thought which has been tingling in one corner of the mind consciously or unconsciously comes to real world so that one can get the feel of it. enjoy it.
We spend time and money in bringing our ideas from imagination to reality, whether it is a research product, a painting, a play, a garden or little nook in the room.
Arts-n-more is one such place where thoughts are converted into reality. Innovative approach to each little thing which matter you most is put thru vigours of evolution
A small beginning has been made, let us see where the destiny takes it
We spend time and money in bringing our ideas from imagination to reality, whether it is a research product, a painting, a play, a garden or little nook in the room.
Arts-n-more is one such place where thoughts are converted into reality. Innovative approach to each little thing which matter you most is put thru vigours of evolution
A small beginning has been made, let us see where the destiny takes it
Subscribe to:
Posts (Atom)







